Ranchi : हाईकोर्ट के आदेश के बाद रिम्स की जमीन (डीआईजी ग्राउंड) को अतिक्रमण मुक्त करने का काम जोर शोर से चल रहा है. यहां तक कि 38 डिसमिल में बने कैलाश कोठी पर बुलडोजर चल गया. इस बीच वहां रहने वाले कई परिवार बेघर हो गए. अब वो इस कड़कड़ाती ठंड में टेंट में रहने को मजबूर हैं.
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ऐसे में सवाल उठ रहा था कि आखिर उन अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो जिन्होंने अतिक्रमण होने में मदद की. कई सीओ ने म्यूटेशन किया. कई रजिस्ट्रार ने रजिस्ट्री की. कई राजस्व कर्मचारी और सीआई ने गड़बड़ी की. नगर निगम और लोकल प्रशासन ने अतिक्रमण करने का लाइसेंस दिया.
अब इस सवाल पर विराम लगता दिख रहा है. क्योंकि एसीबी ने दोषी अदिकारियों पर कार्रवाई करने के लिए जांच शुरू कर दी है. बकायदा एफआईआर दर्ज कर लिया गया है.

हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने को लेकर दिए सख्त आदेश
एसीबी ने झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ के आदेश पर यह कार्रवाई हुई. अदालत ने इस मामले में न सिर्फ अतिक्रमण हटाने का निर्देश जारी रखा है, बल्कि उन दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी एसीबी जांच के आदेश दिए हैं, जिनकी मिलीभगत से यह अवैध निर्माण हुआ है. कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि जिन लोगों के अवैध घर गिराए जा रहे हैं, उन्हें मुआवजा दिया जाएगा. लेकिन इस मुआवजे का पूरा खर्च दोषी अधिकारियों और बिल्डरों से वसूला जाएगा.
करीब सात एकड़ में था अतिक्रमण
पूरा मामला रिम्स की सात एकड़ से अधिक अधिग्रहित जमीन (जो 1964-65 में अधिग्रहीत हुई थी) पर अवैध कब्जे से जुड़ा है. झालसा (झारखंड विधिक सेवा प्राधिकार) की रिपोर्ट से सामने आया था कि इस जमीन पर मंदिर, दुकानें, पार्क और यहां तक कि मल्टीस्टोरी आवासीय इमारतें तक खड़ी हो गईं और उनमें फ्लैट्स बेचे भी गए. अदालत ने इस रिपोर्ट के बाद जिला प्रशासन को 72 घंटे के भीतर अतिक्रमण हटाने का सख्त निर्देश दिया था, जिसके बाद से जिला प्रशासन का अतिक्रमण हटाओ अभियान जोर पर है. इस कार्रवाई के बाद बेघर हुए लोगों को घर तो नहीं मिलेगा, लेकिन थोड़ी राहत जरूर मिली होगी कि उनके साथ जिन्होंने गलत किया, उन्हें भी अब सजा मिल सकती है. बशर्ते एसीबी अपनी जांच में निश्पक्षता रखे.
