BOKARO/GOMIA : आधुनिक विकास के लिए उत्खनन और राजमार्गो के लिए डिफॉरेटेशन किया जा रहा है जिसका खामियाजा अब निर्दोष गांव वालों को उठाना पड़ रहा है. डिफोरेस्टेशन के कारण हाथियों का प्राकृतिक आवासन और भोजन का स्रोत खत्म होता जा रहा है, फलस्वरूप हाथी मानवों की बस्ती की तरफ घुसते जा रहे हैं जिसके कारण मानवों और हाथियों में टकराव देखने को मिल रहा है. इस संघर्ष में नुकसान मानवों का ही देखा जा रहा है.
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इसका ताजा उदाहरण बोकारो के गोमिया क्षेत्र में देखा गया. शनिवार बीती रात बोकारो के गोमिया प्रखंड अंतर्गत दरहाबेड़ा गांव में जंगली हाथियों के हमले में एक व्यक्ति की मौत अपने परिवार को बचाते हुए हो गई. शनिवार की रात लगभग 6 हाथियों का झुंड गांव में दाखिल हो कर उत्पात मचाने लगा. हाथी एक घर की दीवार को गिराने की कोशिश करने लगे, खतरे को भांपते हुए घर के मुखिया करमचंद सोरेन ने सबसे पहले अपने छोटे बच्चे और अपनी पत्नी को सुरक्षित निकाला. उसके बाद वह अपने बड़े बेटे को बचाने के लिए गया इसी दरमियान हाथी ने उसका गर्दन पकड़ कर उसे जमीन पर पटक मारा. जिससे उसकी मौत मौके पर ही हो गई. वहीं बड़ा बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
घटना की सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने पूरी स्थिति का जायजा लिया. कयास लगाया जा रहा कि हाथियों का झुंड अभी भी आस-पास के जंगलों में ही है.
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अब सवाल ये उठता है कि औद्योगिकरण और आधुनिक विकास के कारण वनों की जो कटाई हो रही है, जिसके कारण हाथियों और मानवों में संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो गई है. और जिसका खामियाजा गरीब लोग भुगत रहे हैं उस समस्या से इन लोगों को कैसे निजात मिल पाएगा?
