Nakib Ziya
RANCHI : झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) द्वारा आयोजित सहायक वन संरक्षक की मुख्य परीक्षा एक बार फिर विवादों में घिर गई है. 4 अप्रैल से 12 अप्रैल तक चल रही इस परीक्षा के प्रश्नपत्रों में भारी संख्या में त्रुटियों ने उम्मीदवारों की परेशानी बढ़ा दी है.
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परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों का आरोप है कि लगभग हर प्रश्नपत्र में 100 से अधिक अशुद्धियां हैं. कहीं प्रश्न अधूरे हैं, तो कहीं भाषा की गलतियां, और कुछ जगहों पर विकल्प तक स्पष्ट नहीं दिए गए हैं. ऐसे में परीक्षार्थियों को सवाल हल करने से पहले प्रश्न समझने में ही कठिनाई हो रही है.

अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्षों की मेहनत के बाद जब वे इस स्तर की परीक्षा तक पहुंचे, तो उन्हें इस तरह की लापरवाही का सामना करना पड़ रहा है. कई उम्मीदवारों ने सवाल उठाया है कि यह परीक्षा है या “गलती खोजो प्रतियोगिता”.
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विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस स्तर की परीक्षा में प्रश्नपत्र की गुणवत्ता बेहद महत्वपूर्ण होती है. यदि प्रश्नपत्र में इतनी बड़ी संख्या में त्रुटियां हों, तो यह न केवल परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि आयोग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न उठाता है.

उठ रहे बड़े सवाल:
- आखिर प्रश्नपत्र तैयार कौन कर रहा है?
- क्या किसी स्तर पर मॉडरेशन या प्रूफरीडिंग नहीं की जाती?
- इतनी बड़ी चूक के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
यह मामला सिर्फ एक परीक्षा की त्रुटियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन हजारों युवाओं के भविष्य से जुड़ा है, जिन्होंने इस परीक्षा के लिए कड़ी मेहनत की है. अब देखना यह होगा कि जेपीएससी इस मामले पर क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या भविष्य में इस तरह की गलतियों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं.
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