Veer Vats (AKJ)
RANCHI : जी हां, शीर्षक में लिखे गए एक-एक शब्द सच हैं. बात ऐसे नौकरशाहों (ब्यूरोक्रेट्स) की हो रही है, जो अपने रिटारमेंट प्लान पर काफी गंभीरता से काम कर रहे हैं. नौकरी के बाद की जिंदगी आराम से कटे, इसलिए आज करोड़ों निवेश कर रहे हैं. अब यह करोड़ों रुपए का हिसाब-किताब क्या है? नहीं पता! रांची के सबसे पॉश इलाका अशोक नगर में इनका शीशमहल तैयार हो रहा है. इन ब्यूरोक्रेट्स का शीशमहल जिस तेजी से और जिस तरह का आकार ले रहा है, इससे साफ जाहिर होता है कि साहब लोग इन शीशमहल में रहें ना रहें, यहां से इन्हें सालाना करोड़ों की कमाई निश्चित होगी. यहां एक और बात गौर करने वाली यह है कि जिन साहब का कद जितना बड़ा है, उनका शीशमहल का आकार ही उतना ही बड़ा है.
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सबसे बड़े वाले साहब का शीशमहल
अशोक नगर में शायद ही किसी बिल्डिंग में अंडरग्राउंड पार्किंग की सुविधा है. लेकिन इन साहब के शीशमहल में बकायदा अंडरग्राउंड पार्किंग तक की सुविधा मुहैया कराई जा रही है. महज चार महीने में यह महल ऐसे तैयार हुआ जैसे साहब के गुर्गों ने इसमें अपनी पूरी जान झोंक दी हो. अशोक नगर के चार नंबर रोड वाले इस महल को एक कॉर्मिशयल लुक दिया जा रहा है. देखकर ही लगता है कि यह महल साहब के लिए रिटायरमेंट का बेशकीमती प्लान है. लेकिन साहब फिलहाल इतने पावरफुल हैं कि कोई सवाल तो क्या, सच मानिए तो कोई चूं करने की हिम्मत भी नहीं जुटा सकता है. ईडी और सीबीआई के इस दौर में इतनी हिम्मत करना वाकई काबिले तारीफ है. सत्ता शीर्ष के करीब माने जाने वाले इन साहब की शख्सियत काफी पावरफुल है, इसलिए नाम का उदभेदन नहीं किया जा सकता है.

एक बार ही डीसी बने और खड़ा कर दिया शीशमहल
अशोक नगर के रोड नंबर चार की अपार सफलता के बाद आप जैसे ही रोड नंबर एक पर पहुंचेंगे, यहां भी आपको एक साहब का शीशमहल खड़ा होता दिखाई दे देगा. इन साहब के शीशमहल की भी बनावट कॉमर्शियलनुमा है. यह एकदम मस्त रिटायरमेंट का प्लान है. लेकिन, चौंकाने वाली बात यह है कि अपने पूरे सर्विस के दौरान साहब एक बार ही डीसी बन सके. वो भी एक छोटे से जिले के. तो सवाल उठ रहा है कि आखिर एक बार के डीसी रहे साहब के पास यह अकूत अचल संपत्ति खड़ी करने के लिए बेशुमार दौलत आयी कहां से? खैर, जहां से भी आयी हो, इससे लोगों को फर्क नहीं पड़ना चाहिए. बस यह जानकारी रखनी चाहिए कि शीशमहल वाले साहब नौकरशाह यानी ब्यूरोक्रेट हैं.
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एक ने की है अभी भव्य शुरुआत
अशोक नगर के रोड नंबर चार और एक के बाद घूमते हुए जब आप रोड नंबर छह के पहले मोड़ से अंदर आइएगा. जहां, रांची के सबसे बड़े डॉक्टर साहब रहते हैं. तो, आप वहां एक भव्य ईमारत बनते हुए देख पाएंगे. इस शीशमहल की शुरुआत की भव्यता देखकर आप समझ जाएंगे कि महल कितना बेशकीमती बनने वाला है. रोड नंबर एक वाले साहब की ही तरह इन्हें ज्यादा मलाईदार पद पर रहने का मौका नहीं मिला है. फिर ना जाने ऐसा शीशमहल यह कहां के खड़ा करने की जुगत में लगे हैं. साहब एक बड़े जिले में बतौर डीसी रह चुके हैं. तो लोगों का कहना है कि हो सकता है कि साहब ने मौके पर चौका मारा हो. खैर, लोगों को बस इतनी जानकारी होने की जरूरत है कि यह साहब भी नौकरशाह यानी ब्यूरोक्रेट हैं.
अशोक नगर में नहीं पास होता है कॉमर्शियल बिल्डिंग का नक्शा
अब इन साहबों का शीशमहल कैसे और कहां से बन रहा है, इससे भी ज्यादा यह सवाल जरूरी है कि इन तीनों साहबों का शीशमहल कॉमर्शियल बिल्डिंग का आकार ले रहा है. लेकिन अशोक नगर में कॉमर्शियल बिल्डिंग बनाने की मनाही है. कॉमर्शियल बिल्डिंग के लिए बकाया नक्शा पास कराना जरूरी है. जबकि अशोक नगर में कॉमर्शियल बिल्डिंग का नक्शा पास ही नहीं होता है. ऐसे में समझा जा सकता है कि ये साहब लोग कितने रसूख वाले हैं. इसलिए इनका नाम लेख में नहीं लिया जा रहा है. लेकिन खबर सौ टका सच है.
