RANCHI/GIRIDIH : झारखंड के लोग मजदूर के रूप में पलायन करने पर विवश है. वे मजदूर के रूप में अन्य राज्य या विदेश जाते हैं. वहां वे मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं.दूसरे देश में काम करने के दौरान उन्हें कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.कभी इन्हें तय मजदूरी दर से कम दिया जाता है, कभी विषम परिस्थितियों से में काम करवाया जाता है. काम के दौरान कभी-कभी मजदूर वहां पर दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं.
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क्या है मामला
झारखंड से एक ऐसे ही मजदूर ने पलायन किया था सऊदी अरब की ओर. एक बेहतर जीवन-यापन की उम्मीद में. लेकिन दुर्भाग्य से सऊदी अरब में एक दुर्घटना में उसकी मौत हो गई और उसकी लाश अपने वतन आई है करीब साढ़े तीन महीने बाद. विजय कुमार महतो जो की गिरिडीह जिले के डुमरी के दूधपनिया गांव के रहने वाले थे. 23 अक्टूबर 2025 को सऊदी अरब में कथित पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ के दौरान उनको गोली लगी जिससे उनकी मौत हो गई थी. रविवार की देर शाम विजय का शव रांची पहुंचा. रिम्स के शवगृह में उनका शव रखा गया था. विजय के परिजनों ने रविवार को शव लेने से इनकार कर दिया.
परिजनों ने शव लेने से किया इनकार
एशिया पावर नाम के मेन पावर सप्लाई कंपनी के माध्यम से विजय हुंडई इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन कंपनी में ट्रांसमिशन लाइन प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए दुबई गया हुआ था. वहां पर कथित पुलिस और अपराधियों के गैंग की मुठभेड़ में दुर्भाग्यपूर्ण रूप से विजय उस घटना के शिकार हो गए. घटना के बाद से विजय के परिजन शव को देश लाने और कंपनी से मुआवजे की मांग कर रहे थे. विजय के परिजन सरकार से मुआवजा के लिए गुहार लगा रहे हैं. परिजनों ने कंपनी की ओर से मुआवजे को लेकर लिखित आश्वासन नहीं मिलने तक शव लेने से इनकार कर दिया है. राज्य सरकार ने तत्काल सहायता राशि का प्रस्ताव दिया है, लेकिन परिवार का कहना है कि बच्चों और भविष्य की सुरक्षा के लिए नियोक्ता की जिम्मेदारी तय होना जरूरी है.
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गौरतलब है कि इस मुद्दे को डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो एवं निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने विधानसभा में भी उठाया था. इन विधायकों का स्पष्ट कहना है कि विजय के परिजन को सरकार मुआवजा दिलाए.
