BOKARO : बीएसएल, बोकारो के उत्तरी क्षेत्र के विस्थापित गांवों को पंचायती राज व्यवस्था में जोड़ने की मांग बरसों पुरानी है, इसे लेकर कई आंदोलन, कई प्रयास हो चुके हैं. लेकिन बीएसएल के एनओसी नहीं देने के कारण 19 विस्थापित गांव, गांव की सरकार से वंचित हैं. बीएसएल की संवेदनहीनता भी देखिए, यदि आप अतिरिक्त जमीन का उपयोग नहीं कर रहे हैं, (वैसे भी बीएसएल को जरूरत से कुछ ज्यादा ही जमीन दे दिया गया था) उन जमीनों में पुराने समय से बसे गांव वालों की बुनियादी जरूरतों के लिए पंचायती व्यवस्था में शामिल करने की पहल करते.
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बैठक में शामिल हुए दो विभाग के मंत्री
इन गांवों को पंचायती व्यवस्था में जोड़ने की पहल में राज्य सरकार तत्पर दिख रही है. बोकारो विधायक श्वेता सिंह इस मामले में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने सोशल मीडिया के पेज पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि सोमवार को उनके अलावा राज्य सरकार के भू-राजस्व मंत्री दीपक बिरुआ, पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार तथा जिले के उपायुक्त सहित जिला प्रशासन के अधिकारी एक वर्चुअल बैठक में शामिल हुए.
बैठक में इन गांवों में पंचायत गठन की प्रक्रिया, भूमि अधिग्रहण से जुड़े कानूनी पहलुओं एवं प्रशासनिक समाधान पर चर्चा की गई. सभी पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि बरसों से इन गांवों के लोग अपने बुनियादी अधिकारों से वंचित हैं, इन्हें पंचायती व्यवस्था में जोड़ना बहुत जरूरी है.
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इससे पहले बोकारो विधायक ने इस मुद्दे पर एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाने का आग्रह पंचायती राज मंत्री से किया था. विधायक श्वेता सिंह ने उम्मीद जताई है कि बहुत जल्द बोकारो के विस्थापित परिवारों को उनका संवैधानिक अधिकार और स्थानीय स्वशासन प्राप्त होगा.
