Akshay/Akash
RANCHI : नगरी अंधेर है, बस राजा कैसे हैं, यह समझने और जानने की जरूरत है. माननियों… एक छोटी सी कहानी है. वो भी रांची से सटे खूंटी जिले की. एक अदना सा ग्रामीण अपनी बेटी की बीमारी से परेशान है. बीमारी आम नहीं बल्कि बहुत खास है. वो चल नहीं सकती. कमजोर है. खा भी नहीं सकती. चलना-फिरना तो बहुत दूर की बात है. उसी बेटी के ईलाज के लिए पिता ब्रजेश सिंह ने सोचा कि थोड़ी जमीन बेच दी जाए, ताकि बेटी का ईलाज वेल्लोर में संभव हो पाए. लेकिन वेल्लोर के रास्ते के बीच में आता है खूंटी जिला का कर्रा अंचल कार्यालय, जहां दो साल से ब्रजेश और उसका भाई चक्कार काट रहे हैं. काम बेहद मामूली है. ब्रजेश की जमीन के कागजात ऑनलाइन नहीं थे. वो चाह रहा था कि कागजात ऑनलाइन हो जाए, ताकि वो जमीन बेच सके और अपनी बेटी का इलाज करा सके. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. वही हुआ, जो हमेशा अंचल अधिकारी और उनके सिंडीकेट करते हैं.
पहले ली 24 हजार की रिश्वत, खबर छपने के बाद पैसा वापस कर दिया
Loktantra 19 ने 2 फरवरी को “विवादित कर्रा सीओ अनवेषा ओना पर ग्रामीण लगा रहे संगीन आरोप, सिसक-सिसक कर कह रहा- सीओ दीदी करती हैं बेइज्जत, पैसा देने पर भी नहीं हुआ काम” शीर्षक खबर छापी. जिसका लिंक ऊपर अटैच है. खबर तेजी से वायरल हुआ. दरअसल ब्रजेश बार-बार अपने जमीन के काम को लेकर सीओ ऑफिस के चक्कर काट रहा था. काम नहीं होने पर ब्रजेश ने वहां के राजस्व कर्मचारी को 24 हजार की रिश्वत दी. लेकिन फिर भी काम नहीं हुआ. ब्रजेश और उसका भाई बार-बार सीओ मैडम अनवेष ओना के पास गुहार लगा रहे थे. रो रहे थे. काम कराने के एवज में मैडम के सामने झोली फैलाए हुए थे. लेकिन सीओ अनवेषा मैडम ने उन्हें सरेआम शटअप कहा… और उनका काम नहीं किया. बाद में एक समाजसेवी से बात करते हुए ब्रजेश का ऑडियो वायरल हुआ और Loktantra 19 से खबर छापी. जिसके बाद कर्रा अंचल कार्यालय में हड़कंप मची और राजस्व कर्मी सुबह-सुबह ब्रजेश के घर पहुंचा. रिश्वत का पैसा तो वापस किया ही. काम भी कराने की गारंटी देकर गया.
आखिर क्यों पड़ी रिश्वत लेने और काम ना करने की आदत
झारखंड राज्य में खनन के बाद अगर कोई गंभीर मुद्दा है, तो वो है जमीन मामले से जुड़ा हुआ. राज्य के हर अंचल कार्यालय में भ्रष्टाचार किस तरह व्याप्त है, शायद ही किसी से छिपा है. वही हाल खूंटी जिले के कर्रा अंचल का है और सबसे संगीन आरोप लग रहे हैं वहां के अंचला अधिकारी अनवेषा ओना पर. अनवेषा ओना एक विवदाति पदाधिकारी रही हैं. गिरिडीह जिले के डुमरी प्रखंड में उनपर एफआईआर हुआ है. मामले पंचायत सचिव सुखदेव महतो की खुदकुशी से जुड़ा हुआ है. बताया जाता है कि तत्कालीन बीडीओ अनवेषा ओना ने सुखदेव को इतना मानसिक रूप से प्रताड़ित किया कि सुखदेव ने मौत को गला लिया. ऐसे में अब सवाल उठता है कि क्या ऐसे पदाधिकारी को किसी जनता से जुड़े पद पर काबिज रहने का हक है.
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