JHARKHAND : झारखंड में सरकारी स्कूलों की हकीकत एक गंभीर तस्वीर पेश कर रही है. राज्य में इस समय कुल 35,454 सरकारी स्कूल संचालित हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की कमी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है. ताजा आंकड़ों के अनुसार 516 ऐसे स्कूल हैं, जहां छात्राओं के लिए शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है, जबकि 792 स्कूल ऐसे हैं, जहां छात्रों के लिए भी टॉयलेट उपलब्ध नहीं है. इसके अलावा सैकड़ों स्कूलों में पेयजल की सुविधा या तो नहीं है या फिर उपयोग के लायक नहीं है. यह स्थिति खास तौर पर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में ज्यादा गंभीर है. शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और स्कूल में नियमित उपस्थिति पर पड़ता है, जिसमें सबसे ज्यादा प्रभावित छात्राएं होती हैं.
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शिक्षा विभाग के अनुसार शौचालय और पेयजल की कमी के कारण कई छात्राएं स्कूल आना छोड़ देती हैं और उनका ड्रॉपआउट बढ़ जाता है. इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने सभी स्कूलों में शौचालय सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी छात्रों के लिए शौचालय की शत प्रतिशत उपलब्धता पर जोर दिया है और आठ मार्च अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस तक इस कार्य को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि जिन स्कूलों में शौचालय और पेयजल की सुविधा नहीं है, वहां जल्द से जल्द व्यवस्था बहाल की जाए. अब देखना यह होगा कि सरकारी निर्देश जमीन पर कितनी तेजी और ईमानदारी से लागू होते हैं, ताकि बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक शिक्षा का माहौल मिल सके.
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