RANCHI : सात जनवरी को सोमा मुंडा का मर्डर होता है. शाम को घर लौटते वक्त सोमा की पत्नी के सामने ही सोमा को गोली मार दी जाती है. सोमा मुंडा मौके पर ही दम तोड़ देते हैं. आठ जनवरी को सोमा मुंडा की हत्या के विरोध में खूंटी में लोगों ने हत्याकांड के खिलाफ-प्रदर्शन किया. रोड जाम किए. पुलिस प्रशासन से न्याय की गुहार लगायी गयी. फिर प्रशासन के आश्वासन के बाद विरोध-प्रदर्शन खत्म होता है. शाम को सोमा मुंडा के अंतिम संस्कार के बाद जब सभी अपने घर लौटते हैं तो पुलिस एक्टिव मोड में आती है. पुलिस ने सात में पांच आरोपियों को रात में ही गिरफ्तार कर थाना ले आती है. गिरफ्तार होने वालों में देवा पाहन, बाहा मुंडा, अनीश मुंडा, रामेश्वर सांगा और रविया पाहन शामिल हैं. इनके अलावा देवब्रत नाथ शाहदेव और पंकज शर्मा को भी पुलिस गिरफ्तार करती है. यहां यह जानना जरूरी है कि इन सभी आरोपियों (देवा पाहन, बाहा मुंडा, अनीश मुंडा, रामेश्वर सांगा और रविया पाहन) को पुलिस ने फरार बताया है. जबकि आठ जनवरी को सोमा मुंडा की हत्याकांड के विरोध में होने वाले विरोध-प्रदर्शन में इन पांचों की अहम भूमिका थी. पुलिस ने सभी को उनके घर से गिरफ्तार किया है.
इकबालिया बयान पर उठ रहे हैं सवाल
हालांकि पुलिस ने अबी तक 14 लोगों को गिरफ्तार किया है. शुरुआत में गिरफ्तार किये गये सात आरोपियों में छह आरोपी से पुलिस ने इकबालिया बयान लिया. पंकज शर्मा रिम्स में इलाजरत थे, जानकारी है कि अब उसे भी जेल भेज दिया है. बाकी लिए गए छह आरोपियों के इकबालिया बयान पर अब सवाल उठने लगे हैं. इस बयान को स्टेटमेंट कम और पुलिस की कलम से लिखी हुई स्क्रिप्ट ज्यादा बतायी जा रही है. सभी के इकबालिया बयान को LOKTANTRA19 ने काफी गंभीरता से पढ़ा. पढ़ने के बाद जो जानकारी सामने आयी, वो चौंकाने वाली है. यहां यह जानना जरूरी है कि यह पांचों आरोपी ग्रामसभा के लिए काम करते थे. बाहा मुंडा ग्राम सभा का अध्यक्ष है, देवा पाहन ग्रामसभा के सचिव और बाकी तीनों इन्हीं दोनों के साथ मिलकर काम करते थे. पुलिस की तरफ से जो इकबालिया बयान कोर्ट में दिया गया है, वो सभी बयान एक जैसे ही हैं. नाम और परिचय को छोड़ कर एक भी तथ्य ऐसा नहीं है जो एक-दूसरे से अलग हो. सभी का पेशा और कार्यशैली एक बतायी गयी है. यहां तक कि लिखित इकबालिया बयान में व्याकरण और सार दोनों एक ही जैसा है. कही कुछ अंतर नहीं है.
क्या लिखा गया है इकबालिया बयान में
बाकी लोगों और बाहा मुंडा के बयान में सिर्फ एक ही अंतर है. बाहा मुंडा को ग्रामसभा की अध्यक्ष बताया गया है. वैसे ही देवा पाहन को ग्रामसभा का सचिव और बाकी तीनों को बाहा मुंडा और देवा पाहन का सहयोगी बताया गया है. नाम, पता और इन अंतरों के अलावा एक भी ऐसी बात नहीं है बयान में जो अलग है, लाइन दर लाइन एक जैसा है. जिससे यह साफ होता है कि आरोपियों से बयान लिया नहीं गया है, बल्कि सारी बात पुलिस की तरफ से लिखी गयी स्क्रिप्ट है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या खूंटी पुलिस अपने ही आरोपियों को बचा रही है. क्योंकि कोर्ट में इन इकबालिया बयानों को आसानी से खारिज कर दिया जाएगा. या फिर खूंटी पुलिस इन आरोपी को गिरफ्तार कर किसी और को बचाने की कोशिश कर रही है.
