RANCHI : सोमा मुंडा हत्याकांड में यदि कोई सबसे महत्वपूर्ण कड़ी सामने आती है, तो वह उस समय के खूंटी थाना प्रभारी मोहन कुमार हैं. इससे पहले भी खूंटी थाना के तत्कालीन थाना प्रभारी मोहन कुमार पर कई गंभीर आरोप लगाए जा चुके हैं.
मामला अब सिर्फ आरोप मात्र भर नहीं रह गया था. खुलकर लोगों का गुस्सा ऊफान पर था. सीधा आरोप लगाया जा रहा था कि खूंटी पुलिस अवैध वसूली करती है. धमकी देती है. मंथली तीस हजार रुपया फिक्स है. लेकिन अगर देने में थोड़ा देर हो तो पुलिस गाड़ी पकड़ लेती है. मामला अवैध बालू कारोबार से जुड़ा है. लोगों ने कई बार इसकी शिकायत सीधा खूंटी एसपी से की है. लेकिन मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई. आरोप तत्कालीन थाना प्रभारी मोहन कुमार पर लगता रहा है.
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मोहन कुमार पर सोमा मुंडा हत्याकांड में भी कई तरह के आरोप लगे हैं. यह बात सामने आ चुकी है कि जिस जमीन को लेकर सोमा मुंडा की हत्या की साजिश रची गयी. उस जमीन पर ग्रामसभा की रजामंदी के बाद मोहन कुमार वहां हो रहे काम को रोकने के लिए खुद सिविल ड्रेस में पहुंच गए थे. वो तो फिलहाल सस्पेंड चल रहे हैं. लेकिन सिर्फ सस्पेंशन भर से क्या ही होता है. क्या इतने गंभीर आरोप लगने के बाद मोहन कुमार पर विभागीय कार्रवाई नहीं होनी चाहिए थी. या फिर मोहन कुमार को किसी का वरदहस्त मिला हुआ था.
जानिए किस तरह के आरोप लगे हैं खूंटी पुलिस पर
खूंटी जिला के लोगों की बात सुनेंगे तो पुलिसिया कार्यवाही पर सीधा सवाल उठता है. जानिए क्या कहते हैं खूंटी के लोग.
- किशोर साहू : मेरे पास दो ट्रैक्टर है. हमलोग बालू के कारोबार से जुड़े हैं. हर महीना तीस-पैतीस हजार रुपया खूंटी पुलिस को देते हैं. लेकिन फिर भी हमलोगों का गाड़ी पकड़ लेता है. गाड़ी का सभी पेपर रहने के बावजूद भी एमभीआई करा देता है. एमभीआई वाले ने 1.34 लाख का फाइन काटा है. अब हम लोन भरे या फाइन. जब मंथली पैसा लेते ही हैं, तो गाड़ी क्यों पकड़ लेते हैं. पकड़ा गया ट्रैक्टर थाना में ही खड़ा है, फिर भी गाड़ी भगाने का फाइन चालिस हजार काटा गया है.
- मंदिलू साहूः हमलोग गाड़ी इंट्री करके चलाते हैं. फिर भी थाना गाड़ी पकड़ लेती है. जिससे हमें बहुत ज्यादा परेशानी होती है. अपनी गाड़ी चलाने से पहले पेट्रोलिंग को इंट्री कराते हैं (मतलब रिश्वत देते हैं). खूटी थाना के बड़ा बाबू के पास भी इंट्री कराना होता है. हर महीने तीस-पैतीस हजार रुपया पुलिस वाला लेता है. बड़ा बाबू खुद से पैसा लेते हैं. पैसा पूरे प्रशासन में बंटता है. पेट्रोलिंग वाला लोग जो लेता है वो अलग है. पांच सौ रुपया हर गाड़ी पर पेट्रोलिंग वाला लोग को देना होता है. दस तारीख तक पैसा किसी भी हाल में थाना में जमा करना होता है.
- दीलिप मिश्राः मेरे पास आज सौ ट्रैक्टर वाले आए हैं. उन्होंने कहा कि हर महीने गाड़ी चलाने के एवज में हमलोग इंट्री फीस पुलिस को देते हैं. फिर भी पुलिस गाड़ी पकड़ लेती है. इस मामले को लेकर पुलिस के कप्तान यानी एसपी साहब के पास अपनी बात रखने आए हैं. ट्रैक्टर की बात तो छोड़ दीजिए. यहां खुले आम हाईवा से बालू की अवैध तस्करी करायी जाती है.
- उमेश कुमारः आज मेरे खाली ट्रैक्टर को पीपल चौक से सर्किल इंस्पैक्टर ले गए हैं. जबकि हमलोग मंथली तीस हजार रुपया पेमेंट करते हैं. प्रति गाड़ी तीस हजार रुपया दिया जाता है. बावजूद इसके गाड़ी पकड़ लिया जाता है. पुलिस वाले खुद कॉल करते हैं और पैसा मांगते हैं. हमलोग डर से पैसा पहुंचा देते हैं. खूंटी थाना और मुरहू थाना दोनों मिलकर पैसा लेता है.
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अब ऐसे में सवाल ना उठे तो यह गंभीर मामला है. खुलेआम पुलिस अवैघ वसूली कर रही है. अवैध बालू कारोबार को खूंटी पुलिस हवा दे रही है. और यह सब प्रशासन के आंखों के नीचे हो रहा है. कोई ना देखने वाला है और ना ही कोई रोकने वाला.
