RANCHI : अचानक से झारखंड में बच्चों के लापता होने की घटना आम हो गयी है. रांची के अलावा दूसरे शहरों से भी बच्चे गायब हो रहे हैं. वो तो अंश-अंशिका के घरवालों की किस्मत अच्छी थी कि कुछ भले लोगों की नजर उसपर पड़ गयी और वो बरामद कर लिए गए. वरना ज्यादातर मामलों में पुलिस के हाथ खाली हैं. एक ऐसा ही मामला ओरमांझी का है. यहां 12 साल का कन्हैया करीब 60 दिनों से लापता है. अभी तक पुलिस को एक भी सुराग हाथ नहीं लगा है. थक-हार कर कन्हैया के माता-पिता ने खुद से ही अपने बच्चे को खोजने का बीड़ा उठाया है. उसकी मां तो टाटीसिल्वे, नामकुम, रजरप्पा, रामगढ़, हजारीबाग और देवघर अपने कन्हैया को खोज आयी. लेकिन उसे कहीं अपना 12 साल का कन्हैया नहीं मिला.

18 दिनों के बाद हुआ एफआईआर, लेकिन हाथ अभी तक कुछ नहीं
22 नवंबर को कन्हैया लापता हुआ. उसके बाद उसकी मां पुलिस थाने गयी. पुलिस के समने गुहार लगायी कि किसी तरह उनके कन्हैया को खोजा जाए. लेकिन पुलिस ने 18 दिनों के बाद यानी 11 दिसंबर को एफआईआर दर्ज किया. कन्हैया को खोजने के नाम पर अभी तक पुलिस की तरफ से किसी तरह का कोई कारगर प्रयास नहीं किया जा रहा है. वहीं अंश-अंशिका के मामले में मीडिया के दबाव के बाद पुलिस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. सोशल मीडिया में अंश-अंशिका के वायरल होने के बाद उनका पता चला था. लेकिन कन्हैया के मामले मं ऐसा नहीं हो रहा है. किसी तरह की कोई मुहिम नहीं चलायी जा रही है. एक-दुक्का मीडिया हाउस में कन्हैया की खबर छपी है.
मां को अपने हाथ बनाकर खिलाया था चाट और हो गया गायब
बात 22 नवंबर की है. कन्हैया की मां का कहना है कि कन्हैया ओरमांझी ब्लॉक चौक के पास एसएस प्लस-टू उच्च विद्यालय में बच्चों के साथ फुटबॉल खेलने गया था. वहां से लौटकर वह ओरमांझी ब्लॉक चौक से कुच्चू जाने वाले रास्ते में ममता मार्केट के पास पहुंचा, जहां उसकी मां सड़क किनारे फुचका बेचती है. दुकान पर आने के बाद उसने खुद से चाट बनाया और अपनी मां को भी खिलाया. चाट खाने के बाद वह यह कहते हुए गया कि मां थोड़ी देर में वापस आता हूं, लेकिन इसके बाद से उसका कुछ पता नहीं चला. बेटे के गायब हुए करीब 60 दिन बीत चुके हैं.
बड़ा बेटा कृष्णा कुमार की किडनी है खराब
कन्हैया की बड़ा भाई कृष्णा कुमार 19 साल का है. उसकी मां ने बताया कि बड़े बेटे की एक किडनी खराब है. उससे छोटी बेटी शिवानी कुमारी है. पति अर्जुन साव हैं, लेकिन शारीरिक तौर पर सक्षम नहीं हैं. कन्हैया ही था, जो कक्षा तीन में पढ़ाई करता था. स्कूल से आने के बाद शाम में वह फुचका दुकान में अपनी मां का हाथ बंटाता था. उसकी मां ने कहा कि एक कन्हैया ही उसकी जीने का आस था. लेकिन पता नहीं उसे किसने मुझसे छीन लिया. हर बार वो लोगों से गुहार लगाते दिखी कि किसी तरह उसके कन्हैया को खोज कर ला दिया जाए.
