CHAIBASA : हाथी झारखंड का राजकीय पशु है जो राज्य की पहचान से जुड़ा है. लेकिन खनन, वनों की कटाई और राजमार्गों के निर्माण से उनके प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहे हैं. नतीजतन हाथियों और मनुष्यों में संघर्ष होता है. इस संघर्ष में जीत हाथी की होती है और कई मासूम असमय काल के गाल में समा जाते हैं. ऐसी ही एक घटना मंगलवार को पश्चिमी सिंहभूम के नोवामुंडी में देखने को मिली, जहां एक ही परिवार के पांच लोगों को हाथी ने कुचल कर मार डाला. जिले के डीएफओ के अनुसार मंगलवार की रात नोवामुंडी के बाबरिया गांव में हाथी के हमले में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई जिसमें दो मासूम बच्चे भी शामिल थे. बताया गया कि तकरीबन रात के 10:00 बजे सभी अपने घर में सो रहे थे तभी अचानक हाथी ने हमला कर दिया अचानक हुए इस हमले में परिवार का एक बच्चा किसी तरह भाग कर अपनी जान बचाने में कामयाब रहा.
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क्या कहा वन विभाग ने
डीएफओ का कहना है कि जागरूकता अभियान चलाकर हमने लोगों से घर के बाहर नहीं सोने की अपील की थी. बावजूद इसके लोग घर के बाहर सोते हैं जिसके कारण इस तरह की घटना घटित हो गई. फिलहाल प्रभावित इलाके में वन विभाग की पूरी टीम दौरा कर रही है. ड्रोन के माध्यम से हाथी की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है वन विभाग का कहना है कि हाथी बहुत तेजी से अपनी गतिविधि बदल रहा है जिसके कारण उसे ट्रेस कर पाने में कठिनाई हो रही है. डीएफओ के अनुसार पश्चिम बंगाल से विशेषज्ञों को बुलाया गया है जो हाथी को काबू करने में मदद करेंगे. साथ ही हमने जामनगर स्थित “वनतारा” से भी संपर्क किया है उनके आने के बाद हम अपनी कार्रवाई को और तेज करेंगे.
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हाथी और मनुष्य का संघर्ष
विकास की सतत प्रक्रिया में हाथियों के प्राकृतिक आवास को नष्ट किया जा रहा है. खनन के लिए वनों को काटा जा रहा है. हाथियों के विचरण क्षेत्र को सीमित किया जा रहा है. इसके अलावा राजमार्गों के निर्माण के लिए भी पहाड़ों और वनों को काटा जा रहा है जिसके कारण हाथियों के आवास सिमटते जा रहे हैं. परिणाम स्वरुप हाथी, भोजन की तलाश में जंगलों से निकलकर मानवीय बस्तियों की तरफ बढ़ते हैं जिसके कारण हाथी और मनुष्यों में संघर्ष होता है.
