RANCHI : शुक्रवार को झारखंड सरकार ने PESA एक्ट की अधिसूचना जारी कर दी. हालांकि 23 दिसम्बर को ही मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इसे पास कर दिया गया था. लेकिन कुछ असहमतियों को दूर करने के बाद शुक्रवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई. अधिसूचना के जारी होते ही यह एक्ट राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में प्रभावी हो गया है.
सबसे पावरफुल ग्राम सभा
इस एक्ट में ग्राम सभा को सबसे मजबूत किया गया है. बिना ग्राम सभा की अनुमति के कोई भी सरकारी विभाग अपनी योजना को लागू नहीं कर पाएगी, पुलिस को भी ग्राम सभावके दायरे के अंतर्गत लाया गया है. अनुसूचित क्षेत्रों में अब पुलिस को भी कोई कार्रवाई के लिए ग्राम सभा की अनुमति जरूरी होगी. पारंपरिक ग्राम सभा की बैठक महीने में एक बार अनिवार्य होगी जिसकी अध्यक्षता पारंपरिक ग्राम प्रधान करेंगे. बैठक में किसी निर्णय के लिए एक तिहाई उपस्थिति अनिवार्य होगी, जिसमें महिलाओं की भागीदारी भी एक तिहाई होनी चाहिए. इस एक्ट में यह भी प्रावधान किया गया है कि सरकार द्वारा निर्धारित कोई प्रावधान यदि जनजातीय परंपराओं और उनकी मान्यताओं के विपरीत है तो ग्राम सभा उसके खिलाफ प्रस्ताव पारित कर सकती है. ऐसे मामलों पर राज्य सरकार की उच्चस्तरीय कमिटी विचार करेगी.
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किन संशोधनों के बाद मिली सहमति
- पारंपरिक ग्राम सभा, ग्राम सभाओं तथा उनकी सीमाओं का प्रकाशन और मान्यता की जिम्मेदारी उपायुक्त की होगी. उपायुक्त इसके लिए प्रखंड स्तर पर एक कमिटी का गठन करेंगे .
- आमतौर पर प्रत्येक पारंपरिक ग्राम सभा, राजस्व ग्राम के बराबर होगी. लेकिन पारंपरिक ग्राम सभा के अंतर्गत ग्राम सभा एवं ग्राम सभा की सीमाएं अलग हो सकती हैं. अतः उपायुक्त द्वारा गठित कमिटी पारंपरिक ग्राम सभा के प्रधान और उनके सदस्यों से सहभागिता कर पारंपरिक ग्राम सभाओं की सीमाओं की पहचान करेगी.
पंचायती राज मंत्री ने क्या कहा
पंचायती राज मंत्री दीपिका सिंह पाण्डेय ने कहा कि “राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा को मजबूत किया गया है. इसके अलावा महिलाओं को निर्णय लेने का अधिकार मिला और स्वशासन की परिकल्पना साकार हुई है.”
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