
L19/Ranchi : झारखंड उच्च न्यायालय ने फर्जी प्रीति हत्याकांड के मामले की सुनवाई करते हुए गृह विभाग को पीड़ित अजीत कुमार को पांच लाख रुपये का हर्जाना देने का निर्देश दिया है। जस्टिस संजय कमार द्विवेदी की अदालत ने अजित कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है। झारखंड उच्च न्यायालय ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि बगैस सही तरीके से जांच किए किसी को जेल भेज देना गंभीर मामला है। याचिकाकर्ता अजित कुमार ने दोषी पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने और मुआवजा देने की मांग करते हुए झारखंड उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान प्रार्थी का पक्ष रख रहे अधिवक्ता आकाशदीप ने न्यायालय में कहा कि पुलिस की लापरवाही के कारण पीड़ित का करियर बर्बाद हो गया।
सुनवाई के बाद अदालत ने युवक को 5 लाख रुपए हर्जाना देने का निर्देश दिया। 15 फरवरी 2014 को रांची के चुटिया की रहने वाली प्रीति नाम की एक युवती लापता हो गई थी। वह कुछ ही दिनों बाद अपने घर लौट आई थी। 16 फरवरी 2014 को बुंडू से एक युवती का शव बरामद हुआ। शव जली हुई हालत में मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ था कि युवती की हत्या के बाद अपराधियों ने उसे जला दिया था। शव अज्ञात था, पुलिस ने प्रीति के परिजनों को पहचान करने को कहा। कद-काठी लगभग एक जैसी होने के कारण परिजनों ने प्रीति के शव होने की आशंका जताई थी। जिसके बाद पुलिस ने डीएनए मैच कराए बिना मान लिया कि शव प्रीति का है।
रांची के चुटिया की रहने वाली जिस प्रीति नाम की युवती की हत्या के आरोप में पीड़ित को जेल जाना पड़ा था सीआईडी की जांच के बाद इस केस के अनुसंधानकर्ता सुरेंद्र कुमार, तत्कालीन चुटिया थाना प्रभारी कृष्ण मुरारी और तत्कालीन बुंडू थाना प्रभारी संजय कुमार को निलंबित किया गया था। साबित हुआ था कि तीनों ने बिना सही जांच के तीनों छात्रों को गिरफ्तार किया और उन्हें जेल भेज दिया था। अभी तक सरकार की ओर से पीड़ित युवक के पुनर्वास के लिए कुछ भी नहीं किया गया है
